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गैंग्रीन के मरीज को नारायण अस्पताल में मिला नया जीवन

बिलासपुर के चेयरमैन चित्रक मित्तल मरीज के लिए बने मसीहा
पूरे शरीर में फैलने लगा था रोग, जटिल ऑपरेशन के बाद पैर के बाकी हिस्सा बचाया

रूद्रपुर। नारायण अस्पताल में गैंग्रीन के एक मरीज को नया जीवन मिला है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे इस परिवार के लिए बिलासपुर के पालिका अध्यक्ष चित्रक मित्तल मसीहा बनकर सामने आये। उन्होंने नारायण अस्पताल के एमडी डाक्टर प्रदीप अदलखा से बात की और मरीज को नारायण अस्पताल भेजा। मरीज की हालत को देखते हुए अस्पताल में मामूली खर्च पर मरीज का उपचार शुरू किया गया और गंभीर बिमारी को मरीज के पूरे शरीर में फैलने से रोक लिया। हालाकि उपचार में देरी की वजह से मरीज को पैर का एक हिस्सा गंवाना पड़ा लेकिन अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है।

बिलासपुर निवासी दिनेश एक साल पहले सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था उसके पैर में फैक्चर हुआ। जिस पर परिवार वाले उसे मुरादाबाद के एक अस्पताल में ले गये। यहां पर मरीज का आपरेशन हुआ और पैर में रॉड डाली गयी। लेकिन दुर्भाग्य से आपरेशन सफल नहीं हुआ। इसके बाद दिनेश और उसके परिवार की मुश्किलें बढ़ गयी। इलाज में काफी पैसा खर्च किया लेकिन पैर की हालत बिगड़ती चली गयी। दिनेश का पैर सड़ने लगा। कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते दिनेश और उसके परिवार के सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा हो गया, दूसरे अस्पतालों में ले गये तो दिनेश को पैर काटने की सलाह दी गयी। दरअसल दिनेश का पैर गैंग्रीन रोग की गिरफ्त में आ चुका था और धीरे-धीरे रोग पूरे शरीर में फैलने लगा। बिमारी से बुरी तरह टूट चुके दिनेश को अपने सामने मौत खड़ी नजर आ रही थी। निराशा से बुरी तरह घिर चुके दिनेश को किसी ने बिलासपुर के नगर पालिका अध्यक्ष चित्रक मित्तल के पास जाने की सलाह दी।

चित्रक मित्तल ने दिनेश की व्यथा सुनी और उसके परिवार की आर्थिक हालत को देखते हुए तुरंत मामले को लेकर नारायण अस्पताल के एमडी डा. प्रदीप अदलखा से बात की। डा. प्रदीप अदलखा ने मरीज को तुरंत अस्पताल भेजने के लिए कहा। नारायण अस्पताल में डा. प्रदीप अदलखा की देख-रेख में मरीज का उपचार शुरू किया गया, जब दिनेश नारायण अस्पताल में पहुंचा तो उसके पैर में संक्रमण बुरी तरह फैल चुका था, और संक्रमण पूरे शरीर में फैल रहा था। अस्पताल की टीम ने दिनेश के पूरे पैर को बचाने की तमाम कोशिशें की लेकिन उपचार में पहले ही बहुत देर हो चुकी थी जिस कारण मरीज के पैर के एक हिस्से को काटना पड़ा। जटिल आपरेशन करके दिनेश के पैर के एक हिस्से को काटकर गैंग्रीन के संक्रमण को पूरी तरह रोका गया। इससे मरीज की जान तो बच गयी लेकिन दिनेश को पैर का एक हिस्सा गंवाना पड़ा। दिनेश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मामूली खर्च पर उसका उपचार किया गया। यह खर्चा भी चेयरमैन चित्रक मित्तल ने उठाया और मरीज के परिवार से कोई पैसा नहीं लिया गया।

ऑपरेशन सफल होने पर दिनेश और उसके परिवार ने नारायण अस्पताल की पूरी टीम और चेयरमैन चित्रक मित्तल का आभार व्यक्त किया। दिनेश का कहना था कि उसे अपनी मौत सामने खड़ी नजर आ रही थी, उसने जीने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। उसके लिए चेयरमैन चित्रक मित्तल और डा. प्रदीप अदलखा मसीहा बनकर आये। नारायण अस्पताल के एमडी डा. प्रदीप अदलखा ने बताया कि दिनेश के शरीर में गैंग्रीन का संक्रमण बुरी तरह फैल चुका था। समय पर वह नारायण अस्पताल पहुंचता तो शायद उसके पूरे पैर को बचाया जा सकता था।

 

क्या है गैंग्रीन रोग
नारायण अस्पताल के एमडी डा. प्रदीप अदलखा के मुताबिक जब शरीर के किसी भी हिस्से में चोट लग जाती है, और वह सही ढ़ंग से ठीक नहीं होता हैं तो कुछ दिनों के बाद यह सड़ने लगता है और यह एक नई समस्या पैदा करती है जिसे गैंग्रीन के नाम से जाना जाता है। गैंगरीन का अर्थ है ऊतक का सड़ना। यह रोग इतना घातक है कि यह शरीर की हर कोशिका को प्रभावित कर सकता है और एक दिन मरीज की मृत्यु शरीर के सड़ने के कारण हो सकती है। गैंगरीन तीन प्रकार के होते हैं सूखी गैंग्रीन, वेट गैंग्रीन और गैस गैंग्रीन। सूखी गैंगरीन शरीर के बाहरी हिस्से में विकसित होती है। यह अंग तक पर्याप्त मात्रा में खून ना पहुंच पाने के कारण होता है। शुष्क गैंगरीन आमतौर पर बुजुर्गों के पैरों और उनकी उंगलियों पर विकसित होता है, जो आर्टेरियोस्क्लेरोसिस बीमारी के कारण होता है। यह धीरे-धीरे बढ़ता है और उन ऊतकों पर आ कर रुक जाता है, जिनको पर्याप्त मात्रा में खून मिल रहा हो। शुष्क गैंगरीन से प्रभावित त्वचा सूख कर सिकुड़ जाती है और उसका रंग गहरा लाल-काला हो जाता है। यह नम ऊतकों में होता है, जैसे कि मुंह, फेफड़े, आंत, सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) और वाल्व आदि। कूल्हे व एड़ियों आदि पर होने वाले बेड सोर्स भी वेट गैंग्रीन का एक प्रकार होता है। वेट गैंग्रीन को आमतौर पर कुछ बैक्टीरिया से संबंधित स्थिति माना जाता है। वेट गैंगरीन की तुलना में सेप्टिसीमिया के कारण रोग का निदान करना मुश्किल है। शुष्क गैंगरीन से प्रभावित हिस्से में खून ठहर जाता है जिससे बैक्टीरिया तेजी से बढ़ने लग जाते हैं। गैस गैंग्रीन एक प्रकार का जीवाणु संक्रमण है, जो ऊतकों में गैस पैदा करता है। यह गैंगरीन का सबसे गंभीर प्रकार है। संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है, क्योंकि बैक्टीरिया द्वारा उत्पन्न बैक्टीरिया आसपास के स्वस्थ ऊतकों में घुसना शुरू कर देते हैं। इसके आसपास के ऊतकों के तेजी से फैलने के कारण, इस स्थिति को गंभीरता से लिया जाता है और चिकित्सा आपातकाल के रूप में माना जाता है। गैंग्रीन के लक्षण होने पर इसका तुरंत उपचार करने में ही भलाई है, अन्यथा मरीज की जान जा सकती है। इसलिए शरीर मेे लगने वाली चोट को हल्के में नहीं लेना चाहिए। खासकर शुगर के मरीजों को चोट का उपचार करने में जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।